समय की गति और नियति जीवन की अवधारणाऒं को जब जब सतत और नये आयाम देते रही है अन्तर्मन में उठ्ती स्पन्दनाऐं क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं की तरह स्वत: ही पदों और छन्दों के रूप में परिलक्षित हुई हैं ...मेरा ब्लाग इन्ही स्पन्दनाओं को ऎक मन्च देने की कोशिश है.....
Thursday, September 2, 2010
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