
बहुत दिनों बाद मौसम खुशगवार लगता है .
हवा ने शायद करवट बदल ली होगी !!
वो जमीं के शख्स उड्ते हैं आसमानों में
शायद दो रोटी मयस्सर हो गयी होगी !!
भरी है आज फिर उडान इन पतंगो ने
शमां की लौ में शायद कुछ नमी होगी !!
गिर के उठे, उठ के चले यारॊ जब भी
छालों भरे पांवों के नीचे जमीं होगी !!
होता रहा बंट्वारा पहले भी घरों का यारो
ईंट से ईंट तो ऐसे ना कभी बजी होगी !!
बो डालें चल अब आशा के बीज जीवन में
खुशियों से कल दुनियां अपनी तो भरी होगी !!
बहुत अच्छे ख़यालात , बधाई। अगर इसे कविता कहें तो शायद मुकम्मल है, अगर इसे ग़ज़ल कहोगे तो थोड़ी कोशिशों से छंद
ReplyDeleteमें लिखा जा सकता है। फिर भी भाव पक्छ आपका मज्बूत है।कलम चलती रहनी चाहिये। comment setting से वर्ड वेरीफ़िकेशन हटा लें।
बड़ी अच्छी कविता लिख लेते है आप बस इसे जरा मांझने कि जरुरत है और मेर ख्याल से वक्त के साथ और लिखते-लिखते वह भी हो जायेगा और हां आप अपने ब्लॉग से word verification हटा दीजिए इससे comment देने में परेशानी आती है ऐसा आप setting में कमेन्ट तब में जाकर कर सकते है
ReplyDeleteस्वागत है मेरे ब्लॉग पर
http://www.jakhira.blogspot.com
Thanks Gehlod ji. I know i am responding after long time of your comment. Thanks for your good words and advice.
ReplyDelete